जिस देवराहा बाबा आश्रम में जा रहे श्रद्धालुओं की हुई है मौत, वे 500 सालों तक थे जीवित!
देवराह बाबा आश्रम जा रहे थे पंजाब से आए श्रद्धालु, कौन हैं ये रहस्यमयी संत?
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मथुरा में एक नाव पलटने से 9 लोगों की मौत हो गई है और 22 लोगों को रेस्क्यू किया गया था. ये सभी श्रद्धालु पंजाब से आए थे और देवराहा बाबा आश्रम जाने वाले थे. एक लोकप्रिय कथा के अनुसार, बाबा ने कई बार भविष्यवाणियां कीं, जो बाद में सच साबित हुईं. उनके अनुयायी बताते हैं कि वे लोगों की समस्याएं बिना बताए ही समझ लेते थे और सरल उपाय बताकर उन्हें दूर कर देते थे. यही कारण है कि उनके पास दूर-दूर से लोग अपनी समस्याएं लेकर आते थे. आइए जानते हैं कौन है देवराह बाबा.
कान्हा की नगरी मथुरा में श्रद्धालुओं से भरी नाव पांटून ब्रिज से टकराकर पलट गई. इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई है और अभी तक 22 लोगों का रेस्क्यू कर लिया गया है. सभी श्रद्धालु पंजाब से आए थे और मथुरा-वृंदावन घूमने के क्रम में देवराहा बाबा के आश्रम जा रहे थे. देवराह बाबा के बारे में बताया जाता है कि वे काफी लंबे वर्षों तक जीवित रहे थे और अपने रहस्यमयी जीवन के लिए काफी प्रसिद्ध थे. उनके पास कई तरह की सिद्धियां थीं, जिसके कारण वे काफी सालों तक भूखे प्यासे रह सकते थे और लोगों को अपने चमत्कारों से ठीक भी कर देते थे. उनके जानने वाले बताते हैं कि देवराह बाबा का रहना-सहना, जप-तप, जीवनशैली समेत सभी चीजें सांसारिक सीमाओं से परे थीं. आइए जानते हैं देवराह बाबा के बारे में…
जमीन पर नहीं रखते थे पैर
देवरहा बाबा का जीवन अत्यंत साधारण लेकिन रहस्यमय बताया जाता है. कहा जाता है कि वे उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले और बाद में मथुरा क्षेत्र में रहते थे. उनकी एक विशेष पहचान थी, वे जमीन से 10–12 फीट ऊंची लकड़ी के मचान (चबूतरे) पर बैठकर अपने भक्तों को दर्शन देते थे. यही कारण था कि लोग उन्हें दूर से ही प्रणाम करते और उनका आशीर्वाद लेते थे. जब उनसे इसका कारण पूछा गया तो वह कहते थे कि योगियों को जल, अग्नि और शिला से चार हाथ ऊपर ही रहना चाहिए.
बाबा की उम्र को लेकर कई दावे
बाबा की उम्र को लेकर भी कई तरह के दावे किए जाते हैं. कुछ अनुयायियों का कहना है कि उन्होंने सैकड़ों वर्षों तक जीवित रहकर साधना की, हालांकि इसका कोई आधिकारिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है. फिर भी, उनकी लंबी आयु और तपस्या की कहानियां लोगों में गहरी आस्था जगाती हैं. कोई बताता है कि बाबा 500 साल तक जीवित थे तो कई 100 बताता है तो कोई 250 साल. देवरहा बाबा के चमत्कारों की चर्चा भी खूब होती है. भक्तों का दावा है कि बाबा के आशीर्वाद से कई लोगों की बीमारियां ठीक हो गईं, कठिन समस्याएं हल हो गईं और जीवन में सकारात्मक बदलाव आए. कहा जाता है कि वे बिना किसी औपचारिक चिकित्सा के ही लोगों को ठीक कर देते थे.
बड़े-बड़े लोग आते थे दर्शन करने
इतना ही नहीं, पीएम, सीएम समेत कई बड़े नेता और प्रसिद्ध व्यक्ति भी उनके दर्शन के लिए पहुंचे. उस समय के कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने भी उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की थी, जिससे उनकी ख्याति और बढ़ी. वर्ष 1990 में उनके निधन के बाद भी उनके आश्रम और स्मृति स्थल पर भक्तों की भीड़ लगी रहती है. लोग आज भी उन्हें एक दिव्य संत के रूप में याद करते हैं और उनके बताए मार्ग पर चलने की कोशिश करते हैं.
कांग्रेस पार्टी को दिया चुनाव निशान
देश जब आपातकाल के तौर से गुजर रहा था. उसके बाद इंदिरा गांधी चुनाव हार चुकी थीं. इसके बाद इंदिरा देवराहा बाबा के पास आशीर्वाद लेने पहुंची. कांग्रेस पार्टी का सिंबल फ्रीज हो चुका था. जब बाबा ने अपने हाथ उठाकर पंजे से इंदिरा गांधी को आशीर्वाद दिया तो नए सिंबल की की तलाश पूरी हुई. उसके बाद इंदिरा गांधी ने तय किया कि कांग्रेस पार्टी का चुनाव निशान हाथ का पंजा होगा.
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पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें


