जब नेहा ने ठाकुर जी की 5 आदतों को बनाया रूटीन, तो जिंदगी में दिखने लगा चमत्कारी बदलाव, आप भी करें ट्राई
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Daily Routine: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान हर वक्त तनाव, डर और अनिश्चितता से घिरा रहता है. कब क्या हो जाए, कौन सी परेशानी सामने आ जाए, यह कोई नहीं जानता. ऐसे में लोग बाहर की दुनिया में समाधान खोजते हैं, जबकि हमारे अपने घर में, अपने ठाकुर जी के पास ही सुकून और सुरक्षा का रास्ता मौजूद होता है. कहा जाता है कि जो इंसान इन पांच बातों को ईमानदारी से याद रखता है, उसके जीवन में दुख, भय और नकारात्मकता धीरे-धीरे कम होने लगती है. ये बातें शरीर, मन और सोच-तीनों पर असर डालती हैं. आइए जानते हैं ठाकुर जी से जुड़ी उन पांच आसान आदतों के बारे में, जिन्हें अपनाकर जीवन को ज्यादा सुखद और सुरक्षित बनाया जा सकता है.
ठाकुर जी से जुड़ी ये पांच सरल आदतें-चरणामृत, मंत्र स्मरण, नाम संकीर्तन, दंडवत प्रणाम और वृंदावन की रज-जीवन में शांति, सुरक्षा और पॉजिटिव सोच लाने में मदद करती हैं. थोड़ी श्रद्धा और नियमितता से इंसान खुद बदलाव महसूस करने लगता है.

1. रोज ठाकुर जी का चरणामृत पीने की आदत भक्ति मार्ग में चरणामृत का बहुत महत्व माना गया है. ऐसा कहा जाता है कि ठाकुर जी के चरणों से जुड़ा जल सिर्फ पानी नहीं होता, उसमें एक अलग ऊर्जा होती है. रोज थोड़ा सा चरणामृत पीने से मन में शुद्धता आती है और दिन की शुरुआत एक पॉजिटिव भाव के साथ होती है. भक्तों की मान्यता है कि चरणामृत में रोगों को शांत करने की शक्ति होती है और यह अकाल मृत्यु जैसे भय को दूर रखता है. चाहे इसे आस्था कहें या मानसिक मजबूती, लेकिन यह सच है कि जब इंसान दिन की शुरुआत विश्वास के साथ करता है, तो उसका असर पूरे दिन पर दिखता है.

2. घर से निकलते वक्त 11 बार मंत्र का स्मरण जब भी घर से बाहर निकलें, खासकर किसी जरूरी काम या यात्रा पर, तो कम से कम 11 बार इस मंत्र का स्मरण करने की आदत डालें- “कृष्णाय वासुदेवाय हरे परमात्मने प्रणत क्लेश नाशाय गोविंदाय नमो नमः”
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इस मंत्र को उंगलियों पर गिनते हुए बोलना बताया गया है. मान्यता है कि ऐसा करने से दुर्घटना, एक्सीडेंट और अनहोनी से रक्षा होती है, अगर कभी कोई मुश्किल हालात बन भी जाए, तो इंसान सुरक्षित निकल आता है. असल में यह मंत्र मन को स्थिर करता है और डर को कम करता है, जिससे व्यक्ति ज्यादा सजग रहता है.

3. रोज 20–30 मिनट नाम संकीर्तन दिन में कभी भी 20 से 30 मिनट ऐसा समय जरूर निकालें, जब आप अपने घर में ठाकुर जी के सामने बैठकर नाम संकीर्तन कर सकें. यह समय मोबाइल, टीवी और बाहरी दुनिया से दूर होना चाहिए. जितना हो सके, उतने आनंद और डूबे हुए मन से भगवान का नाम लें. नाम संकीर्तन सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि मन की सफाई का तरीका भी है. इससे भीतर जमा तनाव, गुस्सा और नकारात्मक सोच धीरे-धीरे बाहर निकलने लगती है. कई लोग बताते हैं कि नियमित नाम संकीर्तन से नींद बेहतर होती है और सोच ज्यादा शांत हो जाती है.

4. रोज 11 साष्टांग दंडवत प्रणाम घर में जो ठाकुर जी विराजमान हैं, उनके सामने रोज 11 बार साष्टांग दंडवत प्रणाम करने की आदत डालें. ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति कृष्ण को पूरे समर्पण के साथ प्रणाम करता है, उसे बार-बार जन्म लेने का बंधन नहीं रहता. आध्यात्मिक बातों से अलग देखें तो यह अभ्यास अहंकार को कम करता है. जब इंसान रोज खुद को झुकाना सीखता है, तो उसके भीतर विनम्रता आती है और जीवन की परेशानियां उतनी भारी नहीं लगतीं.

5. वृंदावन की रज को माथे पर रखना पांचवीं और आखिरी बात है वृंदावन की रज. मान्यता है कि वृंदावन की मिट्टी में खास पवित्रता होती है. जरा सी रज माथे पर या बालों के बीच रखी जाए तो जीवन में मंगल भाव बढ़ता है. इससे सोच में पॉजिटिव बदलाव आता है और इंसान खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है. यह रज याद दिलाती है कि हम अकेले नहीं हैं, हमारे साथ ठाकुर जी की कृपा जुड़ी हुई है.

इन पांच बातों का जीवन पर असर जो लोग इन पांच बातों को रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाते हैं, वे बताते हैं कि उनका मन ज्यादा शांत रहता है, डर कम होता है और मुश्किल हालात में भी उम्मीद बनी रहती है. यह सिर्फ किसी के आशीर्वाद पर भरोसा करने की बात नहीं है, बल्कि खुद को एक अनुशासन और श्रद्धा से जोड़ने का तरीका है. जब मन मजबूत होता है, तो हालात अपने आप आसान लगने लगते हैं.


