चंद्र ग्रहण कैसे होता है? जानें पूर्ण, आंशिक और उपछाया चंद्र ग्रहण के बारे में
Chandra Grahan kaise hota hai?: रात का आसमान अचानक गहरा हो जाए, चांद का चेहरा लालिमा से भर उठे और लोग छतों पर खड़े होकर आसमान निहारने लगें यही है चंद्र ग्रहण का जादू. ज्योतिष में इसे सिर्फ खगोलीय घटना नहीं, बल्कि ऊर्जा परिवर्तन का संकेत माना जाता है. सदियों से चंद्र ग्रहण को मन, भावनाओं और भाग्य से जोड़कर देखा जाता रहा है. आखिर क्या होता है इस दौरान, और क्यों कहा जाता है कि यह रात साधारण नहीं होती?
चंद्र ग्रहण कैसे लगता है?
वैज्ञानिक तथ्य
वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी सूर्य की रोशनी को चंद्रमा तक पहुंचने से रोक देती है. जैसे-जैसे चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है, उसका उजला चेहरा धुंधला होने लगता है. पूर्ण अवस्था में वह लाल रंग का दिखाई देता है, जिसे आम भाषा में “ब्लड मून” भी कहा जाता है.
-पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया तो उसमें से कई दिव्य वस्तुएं निकलीं. अंत में अमृत कलश प्रकट हुआ. अमृत पाने के लिए दोनों पक्षों में होड़ मच गई. तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया और देवताओं को अमृत बांटने लगे. उसी समय स्वरभानु नाम का एक असुर देवता का रूप लेकर पंक्ति में बैठ गया.
चंद्रमा और सूर्य ने उसकी चालाकी पहचान ली और इशारा कर दिया. जैसे ही अमृत की बूंदें उसके गले तक पहुंचीं, विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर अलग कर दिया. अमृत का असर होने के कारण वह मरा नहीं. उसका सिर राहु और धड़ केतु कहलाया. तब से राहु और केतु को छाया ग्रह माना जाता है.
मान्यता है कि राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा से बदला लेने की कोशिश करते हैं. जब राहु चंद्रमा को अपने प्रभाव में लेता है तो उसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है. कुछ समय बाद चंद्रमा फिर से चमकने लगता है, क्योंकि राहु उसे पूरी तरह निगल नहीं पाता. इसी कथा के कारण ग्रहण को केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि भावनाओं और विश्वास से जुड़ा प्रसंग माना जाता है.
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पूर्ण चंद्र ग्रहण: जब चांद ओढ़ लेता है लाल चादर
पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी की पूर्ण छाया, यानी अम्ब्रा, में प्रवेश करता है. इसी समय वह लाल रंग का दिखता है. यह लालिमा पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर गुजरने वाली सूर्य की किरणों के कारण होती है.
ज्योतिषीय मान्यता कहती है कि यह समय आत्ममंथन का होता है. कई लोग इस रात ध्यान, मंत्र जाप या मौन साधना करते हैं. ग्रामीण इलाकों में आज भी बुजुर्ग सलाह देते हैं कि ग्रहण के दौरान भोजन न करें और सकारात्मक सोच बनाए रखें. भले ही विज्ञान इसे आवश्यक न माने, लेकिन आस्था का अपना स्थान है.
आंशिक और उपछाया चंद्र ग्रहण: हल्की छाया, सूक्ष्म प्रभाव
आंशिक चंद्र ग्रहण
जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया के केवल एक हिस्से से गुजरता है, तो उसका कुछ भाग ही गहरा या लाल दिखाई देता है. इसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहा जाता है. यह उतना नाटकीय नहीं होता, लेकिन ज्योतिष में इसे भी महत्वपूर्ण माना जाता है. कहा जाता है कि यह जीवन के किसी एक क्षेत्र जैसे करियर या रिश्तों पर असर डाल सकता है.
उपछाया चंद्र ग्रहण
कभी-कभी चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया में प्रवेश करता है, जो छाया का धुंधला हिस्सा होता है. इस स्थिति में चंद्रमा हल्का सा मटमैला दिख सकता है, लेकिन परिवर्तन स्पष्ट नहीं होता. ज्योतिषी इसे सूक्ष्म ऊर्जा परिवर्तन का समय बताते हैं ऐसा बदलाव जो धीरे-धीरे जीवन में असर दिखाता है.
क्या करें और क्या न करें?
परंपराओं के अनुसार ग्रहण के समय पूजा-पाठ, ध्यान और सकारात्मक विचारों पर जोर दिया जाता है. गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, हालांकि वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं. कई लोग ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर घर की शुद्धि करते हैं.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)


