गर्मियों के साथ बदली बाबा महाकालेश्वर की दिनचर्या, 11 कलशों से ज्येष्ठ पूर्णिमा तक महाकाल

गर्मियों के साथ बदली बाबा महाकालेश्वर की दिनचर्या, 11 कलशों से ज्येष्ठ पूर्णिमा तक महाकाल

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गर्मियों में बदली बाबा महाकाल की दिनचर्या, ज्येष्ठ पूर्णिमा तक भव्य महाअभिषेक

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Mahakaleshwar Jyotirlinga Summer Tradition: बाबा महाकालेश्वर की पूजा और दर्शन का महत्व देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है. गर्मियां आ गई हैं तो अब बाबा महाकाल की पूजा की प्रकिया में कुछ बदलाव किए गए हैं. बाबा महाकाल को गर्मियों में शीतलता प्रदान करने के लिए विशेष अनुष्ठान की तैयारियां शुक्रवार सुबह से ही शुरू हो चुकी हैं. आइए जानते हैं गर्मियों में बाबा महाकाल की पूजा में क्या बदलाव आए हैं…

Mahakaleshwar Jyotirlinga Summer Tradition: उज्जैन को बाबा महाकाल की नगरी कहा जाता है, जहां दर्शन मात्र से ही अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और बुरा समय भी अच्छा समय में परिवर्तित हो जाता है. यही कारण है कि भक्त ना सिर्फ देश से बल्कि विदेश से भी बाबा के दर्शन के लिए आते हैं. अब गर्मियों की शुरुआत के साथ ही बाबा की पूजन प्रक्रिया में बदलाव किया गया है. बाबा को बढ़ते तापमान से बचाने के लिए मंदिर में खास प्रबंध किए जा रहे हैं. शुक्रवार से ही बाबा महाकाल पर सतत शीतल जलधारा अर्पित करने का क्रम प्रारंभ हो गया है, जो ज्येष्ठ पूर्णिमा तक लगातार चलेगा. बाबा का यह अभिषेक सुबह भस्म आरती से शुरू होता है और शाम की पूजा तक रहता है.

सुबह 6 बजे से लेकर शाम के 5 बजे तक लगातार जलधारा अर्पित की जाएगी, जिससे भीषण गर्मी में बाबा महाकाल को शीतलता मिलेगी. गर्मियों के इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान में 11 मिट्टी के कलशों के माध्यम से जलधारा चढ़ाई जाती है. मंदिर की इस प्राचीन परंपरा बाबा महाकाल के रजत अभिषेक पात्र के साथ गलंतिका बांधकर जलधारा अर्पित की जाती है. यह परंपरा वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तक हर वर्ष निभाई जाती है.

मंदिर के पुजारी ने बताया कि बाबा को गर्मी से राहत प्रदान करने के लिए प्राचीन परंपरा का पालन शुरू होने जा रहा है, जिसमें कई नदियों का पवित्र जल मिलाकर बाबा को अर्पित किया जाएगा. उन्होंने बातचीत में कहा कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. इसमें बाबा को बढ़ते तापमान से बचाने के लिए और आनंद देने के लिए शीतल जल अर्पित किया जा रहा है. बाबा ने अपने कंठ में हलाहल ग्रहण किया है, जिसकी वजह से उनका तापमान गर्म रहता है. यही कारण है कि पुजारी मिलकर ऐसी व्यवस्था करते हैं, जिससे बाबा पर निरंतर जल की धारा पड़ती रहे.

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मंदिर के पुजारी ने आगे कहा कि बाबा के ताप को कम करने के लिए ठंडी वस्तुओं का भोग लगाया जाता है और ठंडी वस्तुओं का लेपन भी किया जाता है, जिससे भगवान को हमेशा शीतलता और सुख मिले. पुजारी ने बताया कि वैशाख और ज्येष्ठ के माह में तापमान सबसे अधिक होता है और ऐसे में बाबा को शिव जलधारा अर्पित की जाती है. वैसे तो रोज ही बाबा को जलधारा अर्पित की जाती है, लेकिन शिव जलधारा विशेष है.

पुजारी ने बताया कि शिव जलधारा में दो माह बाबा पर मटके की जलधारा अर्पित होती है, जिसमें मंदिर के तीर्थ कुंड का जल होता है. तीर्थ कुंड में पहले से ही सभी पवित्र नदियों का जल समाहित है. ऐसे में दो माह तक मिट्टी के मटके के जरिए बाबा को शीतलता दी जाती है. उन्होंने बताया कि ऐसा करने से कई यज्ञों का फल मिलता है और जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है.

बाबा महाकालेश्वर की पूजा और दर्शन का महत्व देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है. मान्यता है कि महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और विधिवत पूजा से जीवन के कष्ट कम होते हैं, मानसिक शांति मिलती है और भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव होता है. तड़के भस्म आरती से लेकर दिनभर होने वाली नियमित आरतियों तक, मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रहती है. महाकालेश्वर के दर्शन से जन्म-मृत्यु के चक्र के प्रति वैराग्य की भावना जागृत होती है और साधक को मोक्ष मार्ग की प्रेरणा मिलती है. कई श्रद्धालु जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों से पहले यहां आकर पूजा-अर्चना करते हैं.

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