क्या शिव पूजा में दिशा का असर होता है? जानें कौन सी दिशा है शुभ और कौन सी नहीं, किन बातों का रखें ध्यान?

क्या शिव पूजा में दिशा का असर होता है? जानें कौन सी दिशा है शुभ और कौन सी नहीं, किन बातों का रखें ध्यान?

Right Direction For Shiv pooja: जब भी कोई इंसान शिवजी की पूजा करता है, तो उसका मन यही होता है कि भोलेनाथ जल्दी खुश हों और उसकी हर मनोकामना पूरी हो जाए, लेकिन पूजा करते वक्त कई बार हम कुछ ऐसी छोटी-छोटी बातें नजरअंदाज कर देते हैं, जो पूजा का असर कम कर देती हैं. खासकर दिशा का ध्यान ना रखना एक बड़ी गलती हो सकती है. शिव पूजा में साधक की दिशा, जल चढ़ाने का तरीका और परिक्रमा करने का तरीका सब कुछ बेहद मायने रखता है. शिव पुराण और अन्य ग्रंथों में इन बातों का साफ जिक्र है, जिन्हें ध्यान में रखकर ही पूजा करनी चाहिए. आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य रवि पराशर से.

उत्तर दिशा की तरफ मुख क्यों जरूरी है?
शिव पूजा करते समय सबसे जरूरी बात ये होती है कि आप किस तरफ मुंह करके बैठे हैं.
शिव पुराण में कहा गया है कि अगर कोई साधक उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके पूजा करता है, तो उसे उसका फल हजार गुना ज्यादा मिलता है. उत्तर दिशा को देवताओं की दिशा माना गया है, ये दिशा सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र मानी जाती है, और यही कारण है कि शिवजी की पूजा इसी दिशा की ओर मुख करके करनी चाहिए.

कौन-सी दिशा में नहीं बैठना चाहिए?
शिव पूजा करते समय कुछ दिशाओं से बचना चाहिए:

1. पूर्व दिशा: भले ही इसे ज्ञान की दिशा माना गया हो, लेकिन शिव पूजा में इसका महत्व कम है.
2. पश्चिम दिशा: इस दिशा में बैठकर पूजा करने से मन एकाग्र नहीं होता है.
3. दक्षिण दिशा: इस दिशा को पितरों और यम की दिशा माना गया है, इसलिए शिव पूजा के लिए ये सही नहीं मानी जाती है.

अगर शिवलिंग की दिशा कुछ और हो?
कई बार ऐसा होता है कि किसी मंदिर या घर में शिवलिंग उत्तर दिशा की तरफ न होकर किसी और दिशा में स्थापित होता है. ऐसे में क्या करें?

तो याद रखें – भले ही शिवलिंग किसी भी दिशा में हो, पूजा करने वाले का मुख उत्तर दिशा की ओर ही होना चाहिए. इसका मतलब ये है कि आप अपनी जगह थोड़ी बदल लें, लेकिन पूजा उत्तरमुखी होकर ही करें.

परिक्रमा कैसे करें?
1. शिव जी की परिक्रमा करते वक्त पूरा चक्कर नहीं लगाना चाहिए.
2. सिर्फ आधी परिक्रमा करें, और जलाधारी के पास पहुंचने पर वापस लौट जाएं.
3. ये नियम खासतौर पर इसलिए है क्योंकि जलाधारी को पार करना गलत होता है.

ध्यान रखने वाली बातें
1. पूजा करते समय साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें.
2. शरीर और मन दोनों शांत और पवित्र रखें.
3. बेलपत्र, अक्षत, दूध, जल आदि को सही क्रम में चढ़ाएं.
4. ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करते रहें.
5. पूजा के बाद शिवजी से क्षमा जरूर मांगे अगर कोई गलती हो गई हो.

Source link

Previous post

Kajari Teej Puja Samagri: कजरी तीज की पूजा में जरूर शामिल करें ये चीजें, अभी से नोट कर लें सामग्री की लिस्ट

Next post

Sri Krishna Janmashtami 2025: 16 या 17 अगस्त, मथुरा वृंदावन में कब मनाया जाएगा कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व, जानें शुभ तिथि और महत्व

You May Have Missed