क्या शिव पूजा में दिशा का असर होता है? जानें कौन सी दिशा है शुभ और कौन सी नहीं, किन बातों का रखें ध्यान?
उत्तर दिशा की तरफ मुख क्यों जरूरी है?
शिव पूजा करते समय सबसे जरूरी बात ये होती है कि आप किस तरफ मुंह करके बैठे हैं.
शिव पुराण में कहा गया है कि अगर कोई साधक उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके पूजा करता है, तो उसे उसका फल हजार गुना ज्यादा मिलता है. उत्तर दिशा को देवताओं की दिशा माना गया है, ये दिशा सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र मानी जाती है, और यही कारण है कि शिवजी की पूजा इसी दिशा की ओर मुख करके करनी चाहिए.
शिव पूजा करते समय कुछ दिशाओं से बचना चाहिए:
1. पूर्व दिशा: भले ही इसे ज्ञान की दिशा माना गया हो, लेकिन शिव पूजा में इसका महत्व कम है.
2. पश्चिम दिशा: इस दिशा में बैठकर पूजा करने से मन एकाग्र नहीं होता है.
3. दक्षिण दिशा: इस दिशा को पितरों और यम की दिशा माना गया है, इसलिए शिव पूजा के लिए ये सही नहीं मानी जाती है.
कई बार ऐसा होता है कि किसी मंदिर या घर में शिवलिंग उत्तर दिशा की तरफ न होकर किसी और दिशा में स्थापित होता है. ऐसे में क्या करें?
तो याद रखें – भले ही शिवलिंग किसी भी दिशा में हो, पूजा करने वाले का मुख उत्तर दिशा की ओर ही होना चाहिए. इसका मतलब ये है कि आप अपनी जगह थोड़ी बदल लें, लेकिन पूजा उत्तरमुखी होकर ही करें.
1. शिव जी की परिक्रमा करते वक्त पूरा चक्कर नहीं लगाना चाहिए.
2. सिर्फ आधी परिक्रमा करें, और जलाधारी के पास पहुंचने पर वापस लौट जाएं.
3. ये नियम खासतौर पर इसलिए है क्योंकि जलाधारी को पार करना गलत होता है.
ध्यान रखने वाली बातें
1. पूजा करते समय साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें.
2. शरीर और मन दोनों शांत और पवित्र रखें.
3. बेलपत्र, अक्षत, दूध, जल आदि को सही क्रम में चढ़ाएं.
4. ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करते रहें.
5. पूजा के बाद शिवजी से क्षमा जरूर मांगे अगर कोई गलती हो गई हो.


