क्या आपकी कुंडली में है सडन वेल्थ योग? जिंदगी का ‘रीसेट बटन’ है अष्टम भाव, जानिए अचानक धन लाभ का ज्योतिषीय कनेक्शन

क्या आपकी कुंडली में है सडन वेल्थ योग? जिंदगी का ‘रीसेट बटन’ है अष्टम भाव, जानिए अचानक धन लाभ का ज्योतिषीय कनेक्शन

Sudden Wealth Yog: जिंदगी में कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो बिना किसी प्लानिंग के अचानक हो जाती हैं-किसी को विरासत में जमीन मिल जाती है, किसी की लॉटरी लग जाती है, तो किसी को अचानक शेयर बाजार से बड़ा फायदा हो जाता है. ऐसे अनुभवों को लोग अक्सर किस्मत या भाग्य से जोड़ते हैं, लेकिन ज्योतिष की नजर से देखें तो ये सब घटनाएं जन्मकुंडली के एक खास भाव से जुड़ी मानी जाती हैं-अष्टम भाव. आमतौर पर इसे डर या मृत्यु से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए कई लोग इसका नाम सुनते ही घबरा जाते हैं. जबकि सच्चाई इससे कहीं अलग और ज्यादा दिलचस्प है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अष्टम भाव सिर्फ अंत का नहीं, बल्कि परिवर्तन, छिपे अवसर और अचानक मिलने वाले लाभ का भी संकेत देता है. यही वजह है कि इसे समझना जीवन के कई अनदेखे पहलुओं को समझने जैसा माना जाता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

अष्टम भाव को क्यों कहा जाता है रहस्यों और परिवर्तन का घर
ज्योतिष शास्त्र में लग्न से आठवां स्थान अष्टम भाव कहलाता है. परंपरागत रूप से इसे आयु, मृत्यु और जीवन के अंत से जोड़ा गया है, इसलिए इसे अशुभ मानने की धारणा काफी प्रचलित रही है, लेकिन अनुभवी ज्योतिषी बताते हैं कि यह आधा सच है. असल में अष्टम भाव जीवन के उन मोड़ों का प्रतिनिधित्व करता है, जहां व्यक्ति अचानक बदलता है-कभी परिस्थिति से, कभी अनुभव से, तो कभी किसी अप्रत्याशित घटना से. जैसे किसी परिवार में वर्षों से बंद पड़ी पैतृक संपत्ति का केस अचानक जीत जाना, या विदेश में रहने वाले रिश्तेदार की संपत्ति का हिस्सा मिल जाना. ऐसे कई उदाहरण देखने को मिलते हैं जहां व्यक्ति की आर्थिक स्थिति अचानक बदल जाती है. ज्योतिष में ऐसे बदलावों का संबंध अष्टम भाव से ही जोड़ा जाता है.

विरासत, वसीयत और छिपे धन से अष्टम भाव का रिश्ता
अचानक मिलने वाली संपत्ति का संकेत
ज्योतिष मान्यता के अनुसार अष्टम भाव विरासत, वसीयत और पैतृक संपत्ति का भाव है, अगर इस भाव में शुभ ग्रह हों या अष्टमेश मजबूत स्थिति में हो, तो व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी अचानक धन लाभ या संपत्ति मिलने की संभावना मानी जाती है. गांवों और छोटे शहरों में अक्सर सुनने को मिलता है कि किसी को जमीन के कागज पुराने संदूक में मिल गए या खेत के नीचे दबा खजाना मिल गया. ज्योतिषी इसे भी अष्टम भाव से जुड़ी घटना मानते हैं. हालांकि हर कुंडली में ऐसा योग नहीं होता, लेकिन जहां होता है वहां लाभ अप्रत्याशित ही होता है.

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संकट से उबरकर नई शुरुआत भी अष्टम भाव का संकेत
अष्टम भाव को सिर्फ धन या मृत्यु से जोड़ना अधूरा नजरिया माना जाता है. यह भाव जीवन के बड़े संकटों और उनसे निकलकर होने वाले बदलावों का भी संकेत देता है. जैसे गंभीर बीमारी से उबरने के बाद जीवनशैली बदल जाना, दुर्घटना के बाद आध्यात्म की ओर झुकाव बढ़ जाना, या नौकरी छूटने के बाद नया व्यवसाय शुरू करना-ये सब परिवर्तन अष्टम भाव की प्रकृति से जुड़े माने जाते हैं. ज्योतिष के विद्यार्थियों को सिखाया जाता है कि अष्टम भाव जीवन के “रीसेट पॉइंट” जैसा है. यहां जो भी होता है, वह व्यक्ति को पहले जैसा नहीं रहने देता. इसीलिए इसे पुनर्जन्म और आंतरिक बदलाव का भाव भी कहा गया है.

पदोन्नति से लेकर निलंबन तक: अचानक घटनाओं का कारक
ग्रह दशा और गोचर से सक्रिय होता है अष्टम भाव
ज्योतिष में यह भी मान्यता है कि अचानक पदोन्नति, अचानक ट्रांसफर या अचानक निलंबन जैसी घटनाएं भी अष्टम भाव और उससे जुड़े ग्रहों की दशा-गोचर से प्रभावित हो सकती हैं. कई बार व्यक्ति को खुद समझ नहीं आता कि जीवन में इतना बड़ा बदलाव इतनी जल्दी कैसे हो गया. जैसे किसी कर्मचारी को वर्षों तक सामान्य पद पर रहने के बाद अचानक बड़ी जिम्मेदारी मिल जाना, या बिना अपेक्षा के विदेश पोस्टिंग मिल जाना. ज्योतिषीय व्याख्या में ऐसे मोड़ अष्टम भाव के सक्रिय होने से जुड़े माने जाते हैं.

आयु निर्धारण में अष्टम भाव की अहम भूमिका
ज्योतिष शास्त्र में अष्टम भाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आयु से जुड़ा माना गया है. किसी भी कुंडली का विश्लेषण करते समय अनुभवी ज्योतिषाचार्य सबसे पहले अष्टम भाव, उसके स्वामी यानी अष्टमेश और संबंधित ग्रहों की स्थिति देखते हैं. मान्यता है कि जीवन की अवधि जाने बिना अन्य योगों का फल बताना अधूरा है. हालांकि ज्योतिषी सीधे मृत्यु की तिथि बताने से बचते हैं. वे सामान्य तौर पर अल्प, मध्यम या दीर्घ आयु का संकेत ही देते हैं. इसके लिए अष्टम भाव के साथ मारकेश, दशा, अंतर्दशा, गोचर और अन्य कई गणनाओं का सामूहिक अध्ययन किया जाता है.

अष्टम भाव और आध्यात्मिक झुकाव का संबंध
अष्टम भाव को सन्यास और गूढ़ ज्ञान से भी जोड़ा जाता है. ज्योतिष, तंत्र, रहस्य, जीवन-मरण के प्रश्न, ब्रह्मांड के रहस्यों की खोज-ये सभी विषय इसी भाव की प्रकृति में माने जाते हैं. कई बार देखा गया है कि जीवन में बड़ा झटका लगने के बाद व्यक्ति का झुकाव आध्यात्म या शोध की ओर बढ़ जाता है. इतिहास में भी कई खोजें संकट या जोखिम की स्थिति में हुईं. ज्योतिषीय दृष्टि से इसे अष्टम भाव की जिज्ञासा और गहराई से जोड़कर देखा जाता है.

अष्टम भाव को केवल मृत्यु या भय का प्रतीक मानना एकतरफा दृष्टिकोण माना जाता है. ज्योतिषीय परंपरा में यह भाव जीवन के छिपे मोड़, अचानक परिवर्तन, विरासत, संकट से उबरने की शक्ति और गहरे ज्ञान का प्रतिनिधि माना गया है. यही कारण है कि इसे समझना जीवन की अनिश्चितताओं को समझने जैसा माना जाता है.

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