कोई बच्चों के लिए तड़प उठता है तो किसी के साथ होता है ऐसा..! मृत्यु के समय कैसा होता है एहसास? जानें प्रेमानंद जी महाराज से!

कोई बच्चों के लिए तड़प उठता है तो किसी के साथ होता है ऐसा..! मृत्यु के समय कैसा होता है एहसास? जानें प्रेमानंद जी महाराज से!

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Premanand Ji Maharaj : अंतिम समय में जो कुछ भी याद आता है, वह हमारी आत्मा के लिए एक स्थायी प्रभाव छोड़ता है. इसलिए, प्रेमानंद जी महाराज का संदेश है कि हमें जीवन में प्रेम, श्रद्धा और आत्मविश्वास के साथ भगवान का…और पढ़ें

मृत्यु से पहले का एहसास

हाइलाइट्स

  • प्रेमानंद जी महाराज ने जीवन में भगवान का आश्रय लेने पर जोर दिया.
  • मृत्यु के समय व्यक्ति की अंतिम यादें स्थायी प्रभाव छोड़ती हैं.
  • भगवान का आश्रय लेने से आंतरिक शांति और संतोष मिलता है.

P1emanand Ji Maharaj : प्रेमानंद जी महाराज ने अपने उपदेशों के जरिए लाखों लोगों को जीवन के सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है. उनका कहना है कि जो व्यक्ति उनके द्वारा बताए गए मार्ग पर चलता है, वह जीवन की तमाम परेशानियों और संकटों का समाधान पा सकता है. वे हमेशा यह कहते हैं कि सही दिशा में चलने से व्यक्ति न केवल बाहरी समस्याओं को दूर कर सकता है, बल्कि आंतरिक शांति भी प्राप्त करता है.

प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, जब किसी व्यक्ति का अंतिम समय आता है, तो उसका मन और इंद्रियां घबराने लगती हैं. मृत्यु के समय व्यक्ति का मस्तिष्क बहुत अस्थिर हो जाता है और अंतःकरण भी बेचैन हो जाता है. प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि जिस व्यक्ति ने भगवान का आश्रय नहीं लिया, उसकी सारी प्रियताएं और मोह उसकी अंतिम यादों का हिस्सा बन जाती हैं.

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जो व्यक्ति अपने जीवन में धन, संपत्ति, परिवार या किसी अन्य भौतिक वस्तु के प्रति बहुत ज्यादा प्रेम करता है, उसे अंतिम समय में उसी चीज की याद आती है. जैसे अगर किसी व्यक्ति को बैंक बैलेंस के प्रति ज्यादा मोह था, तो मृत्यु के समय उसे अपना बैंक बैलेंस याद आता है. यदि किसी व्यक्ति को अपने बेटे-बेटी से गहरी लगन है, तो उसका ध्यान उनके बारे में जाता है.

प्रेमानंद जी महाराज यह भी कहते हैं कि जो व्यक्ति अपनी ज़िंदगी में भगवान से दूर रहता है, उसे अंतिम समय में अपने किए गए बुरे कार्यों का एहसास होता है. उसे वे सारे कर्म और वासनाएँ याद आती हैं जो उसने जीवनभर की हैं. इससे उस व्यक्ति का मन विचलित हो जाता है और उसका अंत दुखद होता है.

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प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, इन सभी यादों और मोहों का अंतिम परिणाम यह होता है कि व्यक्ति अगले जन्म में फिर से उन्हीं चीजों के प्रति आकर्षित होता है. इसलिए उन्होंने हमेशा यह सिखाया है कि जीवन में भगवान का आश्रय लेना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे व्यक्ति की आत्मा शुद्ध होती है और वह जीवन के हर संकट से पार पा सकता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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