कुंडली में सूर्य के खराब होने पर मिलते हैं ये संकेत, वक्त रहते कर लें उपाय, वरना आएंगी मुश्किलें !

कुंडली में सूर्य के खराब होने पर मिलते हैं ये संकेत, वक्त रहते कर लें उपाय, वरना आएंगी मुश्किलें !

Astrology ग्रह अपना शुभाशुभ प्रभाव गोचर एवं दशा – अन्तर्दशा – प्रत्यन्तर्दशा में देते हैं. जिस ग्रह की दशा के प्रभाव में हम होते हैं, उसकी स्थिति के अनुसार शुभ अशुभ फल हमें मिलता है. जब भी कोई ग्रह अपना शुभ या अशुभ फल प्रबल रुप में देने वाला होता है तो वह कुछ संकेत पहले से ही देने लगता है. इनके उपाय करके बढ़ी से बढ़ी समस्याओं से बचा जा सकता है, ऐसे ही कुछ पूर्व संकेतों का विवरण यहाँ बताया जा रहा है, आइये जानते हैं कि जन्म कुंडली में सूर्य नीच राशि या पीड़ित होने पर हमें क्या परिणाम प्राप्त होंगे.

जन्मकुंडली में सूर्य के अशुभ होने के पूर्व संकेत:

यदि आपकी कुंडली में सूर्य अशुभ फल देने वाला है तो उसके सक्रिय होने से पूर्व घर में रोशनी देने वाली वस्तुएँ नष्ट होंगी या प्रकाश का स्रोत बंद होगा. जैसे जलते हुए बल्ब का फ्यूज होना, तांबे की वस्तु खोना, किसी ऐसे स्थान पर स्थित रोशनदान का बन्द होना जिससे सूर्योदय से दोपहर तक सूर्य का प्रकाश प्रवेश करता हो. ऐसे रोशनदान के बन्द होने के अनेक कारण हो सकते हैं.

जैसे- अनजाने में उसमें कोई सामान भर देना या किसी पक्षी के घोंसला बना लेने के कारण उसका बन्द हो जाना आदि. सूर्य के कारकत्व से जुड़े विषयों के बारे में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सूर्य जन्म-कुण्डली में जिस भाव में होता है, उस भाव से जुड़े फलों की हानि करता है. यदि सूर्य पंचमेश, नवमेश हो तो पुत्र एवं पिता को कष्ट देता है, सूर्य लग्नेश हो तो जातक को सिरदर्द, ज्वर एवं पित्त रोगों से पीड़ा मिलती है. मान-प्रतिष्ठा की हानि का सामना करना पड़ता है.

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यह मिलता है फल :
1- किसी अधिकारी वर्ग से तनाव, राजसत्ता पक्ष से परेशानी.
2- यदि न्यायालय में विवाद चल रहा हो, तो प्रतिकूल परिणाम प्राप्त होता है.
3- शरीर के जोड़ों में अकड़न तथा दर्द रहता है.
4- किसी न किसी कारण से फसल सूख जाती है अथवा नष्ट हो जाती है.
5- व्यक्ति के मुँह में अक्सर थूक आने लगता है तथा उसे बार-बार थूकना पड़ता है.
6- सिर किसी वस्तु से टकरा जाता है जिससे चोट आदि लग सकती है.
7- किसी न किसी कारणवश तेज धूप में चलना या खड़े रहना पड़ता है.

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यह करें उपाय :
1- सूर्य के मंत्र का जाप करें.
2- सूर्य को ताम्रपात्र से अर्ध्य दें.
3- दैनिक रूप से गुड़ का सेवन करें.
4- ताम्रपात्र में रखकर रोज जल का सेवन करें.
5- रविवार का व्रत करें एवं नमक का सेवन ना करें.

Tags: Astrology, Dharma Aastha, Zodiac Signs

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