कुंडली का ये योग बनाता है जातक को नशेड़ी, कौन-से ग्रह बनाते हैं ये अशुभ योग

कुंडली का ये योग बनाता है जातक को नशेड़ी, कौन-से ग्रह बनाते हैं ये अशुभ योग

Vish Yog Effcets: ज्योतिष की दुनिया में कुछ योग ऐसे होते हैं जिनका नाम सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है. उन्हीं में से एक है “विष योग”-जब चंद्रमा और शनि एक ही भाव में आकर बैठते हैं. आमतौर पर इसे नकारात्मक माना जाता है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि कई सफल और मजबूत व्यक्तित्व वाले लोगों की कुंडली में भी यही योग पाया जाता है. यानी कहानी उतनी सीधी नहीं जितनी हम मान लेते हैं. दरअसल चंद्रमा मन का और शनि कर्म का कारक है. जब मन और कर्म टकराते भी हैं और जुड़ते भी हैं, तो जीवन में अजीब-सी खींचतान बनती है. यही खींचतान कई बार व्यक्ति को कमजोर नहीं बल्कि बेहद दृढ़ बना देती है. तो क्या सचमुच विष योग डरावना है, या यह भीतर की ताकत जगाने वाला योग है-आइए इसे सहज तरीके से समझते हैं.

विष योग क्या है और क्यों बनता है
ज्योतिष के अनुसार जब चंद्रमा और शनि एक ही भाव में होते हैं, तो इसे विष योग कहा जाता है. चंद्रमा भावनाओं, मन और संवेदनशीलता का प्रतीक है, जबकि शनि अनुशासन, कर्म और संघर्ष का. दोनों ग्रह स्वभाव से एक-दूसरे के विपरीत माने जाते हैं. ऐसे में जब ये साथ आते हैं तो व्यक्ति के भीतर एक स्थायी द्वंद्व बन जाता है. मन कुछ चाहता है और कर्म कुछ और करवाता है. यही कारण है कि इस योग वाले लोग अक्सर खुद को लेकर उलझन में रहते हैं, लेकिन यही उलझन उन्हें गहराई भी देती है.

विष योग के सामान्य लक्षण
1. भावनाओं को संभालने में मेहनत
इस योग वाले लोगों में भावनाएं बहुत गहरी होती हैं, लेकिन उन्हें व्यक्त करना आसान नहीं होता. बाहर से ये लोग मजबूत दिखते हैं, भीतर से संवेदनशील रहते हैं. कई बार छोटी बात भी मन पर भारी पड़ जाती है, मगर वे इसे जाहिर नहीं करते.

2. निर्णय लेने में दुविधा
ऐसे लोग विकल्पों के बीच फंस जाते हैं. A या B में से क्या चुनें-यह तय करने में समय लगता है. निर्णय लेने के बाद भी उन्हें लगता है कि शायद दूसरा विकल्प बेहतर था.

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3. आत्मविश्वास में उतार-चढ़ाव
विष योग का एक असर यह भी देखा गया है कि व्यक्ति अपने फैसलों पर जल्दी शक करने लगता है. उसे लगता है कि उसकी किस्मत साथ नहीं दे रही, जबकि वास्तविकता में वह धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा होता है.

4. नशे की लत या गलत संगत
जातक की कुंडली में जब विष योग बनता है तो ऐसे जातक गलत संगल में आकर नशा कर सकते हैं या नशे के आदि हो सकते हैं.

किन भावों में विष योग ज्यादा असर डालता है
1. लग्न (प्रथम भाव) में विष योग
जब चंद्रमा-शनि लग्न में हों, तो व्यक्ति अपनी छवि और स्वास्थ्य को लेकर अधिक चिंतित रहता है. उसे लगता है कि लोग उसे सही नहीं समझते. मूड में अचानक बदलाव भी देखे जाते हैं, लेकिन सकारात्मक पहलू यह है कि ऐसे लोग बेहद सहनशील और संघर्षशील होते हैं. कठिन परिस्थितियों में भी टिके रहते हैं.

2. चतुर्थ भाव में विष योग
यह भाव घर, सुख और मां से जुड़ा होता है. यहां विष योग होने पर व्यक्ति को घरेलू सुखों में कमी महसूस हो सकती है. घर या वाहन से जुड़ी छोटी-मोटी परेशानियां बनी रहती हैं या मां से भावनात्मक दूरी महसूस होती है. फिर भी देखा गया है कि समय के साथ ये लोग अपने दम पर सुख-सुविधाएं हासिल कर लेते हैं.

3. सप्तम भाव में विष योग
संबंधों और विवाह का भाव होने के कारण यहां इसका असर रिश्तों पर दिखता है. विवाह में देरी या प्रेम संबंधों में उतार-चढ़ाव संभव है. व्यक्ति को लगता है कि साथी उसकी भावनाएं नहीं समझ रहा.
पर यही योग सामाजिक प्रतिष्ठा भी देता है-ऐसे लोग समाज में गंभीर और जिम्मेदार माने जाते हैं.

4. दशम भाव में विष योग
करियर के भाव में यह योग व्यक्ति को कामयाबी तो देता है, लेकिन संतोष कम देता है. उसे हमेशा लगता है कि वह और ऊंचाई छू सकता था. दिलचस्प रूप से ऐसे लोगों का व्यावसायिक दिमाग तेज होता है और वे प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने की क्षमता रखते हैं.

5. विष योग के सकारात्मक पक्ष भी कम नहीं
ज्योतिष विशेषज्ञ मानते हैं कि विष योग केवल कठिनाई का संकेत नहीं है. यह व्यक्ति को मानसिक मजबूती, धैर्य और गहरी सोच देता है. ऐसे लोग जीवन की सच्चाइयों को जल्दी समझते हैं और भावनात्मक रूप से परिपक्व होते हैं. यही वजह है कि कई सफल उद्यमियों, कलाकारों और नेताओं की कुंडली में यह योग पाया गया है. संघर्ष उन्हें तोड़ता नहीं, तराशता है.

आसान उपाय जो संतुलन ला सकते हैं
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कुछ छोटे व्यवहारिक उपाय इस योग के नकारात्मक असर को कम कर सकते हैं.
-पहला-पानी का सम्मान करें. घर या कार्यस्थल पर पानी बर्बाद न होने दें.
-दूसरा-बुजुर्गों का सम्मान और सहायता करें. शनि सेवा और अनुशासन का ग्रह माना जाता है.
-तीसरा-पेड़ लगाना या प्रकृति से जुड़ना मानसिक संतुलन देता है.
कुछ लोग फिरोजा रत्न धारण या बुधवार को शहद दान जैसे उपाय भी करते हैं, हालांकि इनका पालन व्यक्तिगत विश्वास पर निर्भर है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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