कर लें मात्र यह एक उपाय तो ग्रह चलेंगे शुभ चाल, दोष भी हो जाएंगे दूर! ज्योतिषाचार्य से जानें

कर लें मात्र यह एक उपाय तो ग्रह चलेंगे शुभ चाल, दोष भी हो जाएंगे दूर! ज्योतिषाचार्य से जानें

इस संसार में किसी ने भी जन्म लिया है, खुशियां और दुख उसके हिस्से में आता ही हैं. हर समस्या के पीछे कोई न कोई ग्रह नक्षत्र ही जिम्मेदार होते हैं. वैदिक ज्योतिष में अनेकों उपाय हर ग्रह और समस्या के लिए बताये गये हैं. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास समय की बहुत कमी है. कुछ उपाय ऐसे हैं, जो काफी खर्चीले हैं, जिस वजह से लोग उन्हें नहीं कर पाते हैं. हमारे जीवन में कुछ भी अच्छा या बुरा सबकुछ किसी ना किसी ग्रह नक्षत्र के संयोग से ही होता है. अगर आप सही समय पर सक्रिय ग्रह का उपाय कर लेते हैं तो आपको उसकी दशा में कष्ट नहीं होते बल्कि लाभ हो जाता है. सक्रिय ग्रह यदि आक्रामक है तो बिना उपाय किये जिंदगी में भूचाल आ जाता है. हमें हमेशा ही अपनी कुंडली के अनुसार ग्रह नक्षत्रों के उपाय करने चाहिए.

नवग्रह के ज्योतिष उपाय

सूर्य : दैनिक रूप से गुड़ खाकर पानी पीकर कोई भी कार्य आरंभ करें एवं बहते जल में रविवार के दिन 250 ग्राम गुड़ प्रवाहित करें.

यह भी पढ़ें: कुंडली में विवाह की बनी हुई है दिक्कत, 10 में से कर लें कोई भी उपाय, जल्द बजेगी शहनाई!

चंद्रमा: सोमवार को सफेद कपड़े में मिश्री बांधकर जल में प्रवाहित करें. कांच के गिलास में दूध, पानी पीने से परेहज करें. 28 वर्ष के बाद विवाह का निर्णय लें. लाल रंग की रूमाल हमेशा जेब में रखें.

मंगल : हनुमान चालीसा या बजरंगबाण का रोज पाठ करें, 400 ग्राम चावल दूध से धोकर 14 दिन तक बहते जल में प्रवाहित करें.

बुध: घर की पूर्व दिशा में लाल झंडा लगायें, 100 साबुत मूंग बहते जल में प्रवाहित करें.

यह भी पढ़ें: निर्धन को भी करोड़पति बना देता है यह राजयोग, क्या आपकी कुंडली में यह है? इन उपायों से करें सक्रिय

गुरु: बहते चने की दाल, 7 हल्दी गांठ एवं केसर प्रवाहित करें. माथे पर केसर का तिलक लगायें.

शुक्र: बहते हुए जल में शुद्ध घी बहाएं, लाल रंग के गाय की सेवा करें,  800 ग्राम जिमीकंद मंदिर में दान करें.

शनि : भगवान भैरव की आराधना करें, शनिदेव का 1 किलो सरसों के तेल से अभिषेक करें, 43 दिन तक लगातार शनि मंदिर में जाकर नीले पुष्प चढ़ायें. शनिवार को 800 ग्राम दूध, उड़द जल में प्रवाहित करें.

राहु: तांबे के बर्तन में गुड़, गेहूं भरकर बहते जल में प्रवाहित करें. 400 ग्राम धनिया, नारियल जल में प्रवाहित करें.

केतु : काले व सफेद तिल बहते हुए जल में प्रवाहित करें. 43 दिन तक मंदिर अथवा धर्म स्थान में केला दान करें.

Tags: Astrology, Dharma Aastha

Source link

Previous post

Pitru Paksha 2024: ये 5 संकेत बताते हैं कि आपसे नाराज हैं पितर, अगर घर में दिखें तो तुरंत हों सावधान, वरना…

Next post

पितृ पक्ष में सिर्फ एक चीज का दान दिलाएगा पितरों का आशीर्वाद, पितृ दोष से भी मिलेगी मुक्ति, होंगे कई लाभ

You May Have Missed