कब है भौम प्रदोष व्रत? बनेंगे 3 शुभ योग, जानें शिव पूजा मुहूर्त, शिववास समय, महत्व

कब है भौम प्रदोष व्रत? बनेंगे 3 शुभ योग, जानें शिव पूजा मुहूर्त, शिववास समय, महत्व

अक्टूबर का पहला प्रदोष व्रत अश्विन मा​ह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाएगा. यह मंगलवार को होने की वजह से भौम प्रदोष व्रत है. हर माह में दो प्रदोष व्रत होते हैं. पहला कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को और दूसरा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को. प्रदोष व्रत के दिन उपवास रखते हैं और शाम के समय में भगवान शिव की पूजा करते हैं. इस बार भौम प्रदोष व्रत के दिन 3 शुभ योग बन रहे हैं. इस दिन रुद्राभिषेक कराने के लिए शिववास भी है. श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी से जानते हैं कि भौम प्रदोष व्रत कब है? पूजा का मुहूर्त क्या है और 3 शुभ योग कौन से हैं?

भौम प्रदोष व्रत 2024 तारीख
दृक पंचांग के अनुसार, इस साल अश्विन मा​ह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 अक्टूबर को तड़के 3 बजकर 42 मिनट से प्रारंभ होगी. इस तिथि का समापन 26 अक्टूबर को 12 बजकर 19 एएम पर होगा. प्रदोष व्रत के पूजा मुहूर्त को देखते हुए भौम प्रदोष व्रत 15 अक्टूबर मंगलवार को रखा जाएगा.

भौम प्रदोष व्रत 2024 मुहूर्त
भौम प्रदोष व्रत के दिन शिव पूजा के लिए आपको 2 घंटे 30 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा. शिव पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 5 बजकर 51 मिनट से प्रारंभ है, जो रात 8 बजकर 21 मिनट तक रहेगा. इस समय में आपको शिव पूजा कर लेनी चाहिए.

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3 शुभ योग में भौम प्रदोष व्रत
इस बार भौम प्रदोष व्रत के दिन 3 शुभ योग बन रहे हैं. उस दिन प्रात:काल से ही वृद्धि योग बनेगा, जो दोपहर 2 बजकर 14 मिनट तक रहेगा. उसके बाद से ध्रुव योग होगा. भौम प्रदोष व्रत पर रवि योग औार सर्वार्थ सिद्धि योग भी बनेंगे.

भौम प्रदोष व्रत पर सर्वार्थ सिद्धि योग रात में 10 बजकर 8 मिनट से शुरू होगा और अगले दिन 16 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. वहीं रवि योग भी रात में 10:08 बजे से लेकर अगले दिन सुबह 06:23 बजे तक है.

इन योग के अलावा उस दिन पूर्व भाद्रपद नक्षत्र है, जो प्रात:काल से रात 10 बजकर 8 मिनट तक रहेगा. उसके बाद से उत्तर भाद्रपद नक्षत्र है.

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भौम प्रदोष व्रत 2024 शिववास
भौम प्रदोष व्रत के दिन आप रुद्राभिषेक करा सकते हैं. उस दिन शिववास नंदी पर है, जो 16 अक्टूबर को देर रात 12 बजकर 19 मिनट तक रहेगा. उसके बाद शिववास भोजन में है.

प्रदोष व्रत पर रोग पंचक
प्रदोष व्रत को पूरे दिन पंचक है. यह पंचक 13 अक्टूबर को 03:44 पी एम से लग रहा है. रविवार को लगने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है. रोग पंचक से लोगों को शारीरिक परेशानियां होती हैं.

भौम प्रदोष व्रत का महत्व
जो लोग भौम प्रदोष व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करते हैं, उन पर महादेव की कृपा होती है. शिव कृपा से उनके दुख दूर होते हैं, पाप मिटते हैं और जीवन सुखमय होता है. भोलेनाथ के आशीर्वाद से आरोग्य, धन, संपत्ति प्राप्त होती है. इसके अलावा व्य​क्ति की मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं.

Tags: Dharma Aastha, Lord Shiva, Religion

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