इस साल कब है ऋषि पंचमी? बन रहे 2 शुभ योग, जानें पूजा मुहूर्त, मंत्र और महत्व

इस साल कब है ऋषि पंचमी? बन रहे 2 शुभ योग, जानें पूजा मुहूर्त, मंत्र और महत्व

ऋषि पंचमी का पर्व हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होता है. इस साल ऋषि पंचमी के दिन 2 शुभ योग बन रहे हैं. ऋषि पंचमी को भाई पंचमी और गुरु पंचमी भी कहा जाता है. ऋषि पंचमी के अवसर पर व्रत रखते हैं और सप्त ​ऋषियों की पूजा करने का विधान है. इससे पाप मिटते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है. श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ मृत्युञ्जय तिवारी बता रहे हैं कि ऋषि पंचमी कब है? ऋषि पंचमी की पूजा का मुहूर्त और महत्व क्या है?

किस दिन है ऋषि पंचमी 2024?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरूआत 7 सितंबर को शाम 5 बजकर 37 मिनट पर होगी. इस तिथि की समाप्ति 8 सितंबर को शाम 7 बजकर 58 मिनट पर होगी. ऐसे में उदयाति​थि की मान्यता के अनुसार ऋषि पंचमी का पर्व 8 सितंबर को मनाया जाएगा.

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ऋषि पंचमी 2024 मुहूर्त
8 सितंबर को ऋषि पंचमी की पूजा का शुभ मुहूर्त दिन में 11 बजकर 3 मिनट से दोपहर 1 बजकर 34 मिनट तक है. उस दिन पूजा के लिए 2 घंटे 30 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा.

ऋषि पंचमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:31 ए एम से 05:17 ए एम तक है. उस दिन का शुभ मुहूर्त या अभिजीत मुहूर्त 11:53 ए एम से 12:43 पी एम तक है.

2 शुभ योग में है ऋषि पंचमी 2024
इस साल की ऋषि पंचमी के दिन 2 शुभ योग बन रहे हैं. सबसे पहले इंद्र योग बन रहा है, जो प्रात:काल से लेकर देर रात 12 बजकर 05 मिनट तक है. वहीं रवि योग दोपहर में 3 बजकर 31 मिनट से अगले दिन 9 सितंबर को सुबह 6 बजकर 3 मिनट तक है.

रवि योग में सभी दोषों को दूर करने की क्षमता है क्योंकि इसमें सूर्य का प्रभाव अधिक माना जाता है. ऋषि पंचमी पर स्वाति और विशाखा नक्षत्र हैं. स्वाति नक्षत्र सुबह से लेकर दोपहर 3 बजकर 31 मिनट तक है.

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ऋषि पंचमी 2024 पूजा मंत्र
कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोथ गौतमः,
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः,
दहन्तु पापं सर्व गृह्नन्त्वर्ध्यं नमो नमः.

ऋषि पंचमी का महत्व
ऋषि पंचमी के दिन सप्त ऋषियों की पूजा करने से घर में सुख और समृद्धि आती है. परिवार में शांति रहती है. वहीं महिलाओं को रजस्वला के समय में जाने-अनजाने में किए गए भूल या दोषों से मुक्ति मिलती है. इस दिन माहेश्वरी समाज की बहनें अपने भाइयों रक्षासूत्र या राखी बांधती हैं.

Tags: Dharma Aastha, Religion

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