आमलकी एकादशी पर क्यों करते हैं आंवले के पेड़ की पूजा? यह व्रत कैसे बदल सकती है आपकी लाइफ, जानें आंवला प्रसाद के 5 फायदे
आमलकी एकादशी पर क्यों करते हैं आंवले की पूजा? जानें आंवला प्रसाद के 5 फायदे
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आमलकी एकादशी का व्रत 27 फरवरी को है. इस व्रत में आंवले के पेड़ की पूजा करते हैं और भगवान विष्णु को आंवले के फल का भोग लगाते हैं. प्रसाद स्वरूप आंवला खाते हैं. आमलकी एकादशी व्रत में आंवले के पेड़ की पूजा, आंवले का भोग और प्रसाद के कई फायदे होते हैं.
आमलकी एकादशी पर आंवले के पेड़ की पूजा करते हैं.
जैसा कि आपको पता है कि हिंदू धर्म में व्रत और पूजा करने का विशेष महत्व है. लोग ऐसा मानते हैं कि व्रत और पूजा करने से भगवान खुश होते हैं और मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं. सभी व्रतों में एकादशी एक महत्वपूर्ण व्रत है. इस समय फाल्गुन का महीना चल रहा है और इसमें सबसे पहले आमलकी एकादशी का व्रत आ रहा है. आमलकी एकादशी का व्रत 27 फरवरी शुक्रवार को रखा जाएगा. पूरे देश में लोग आमलकी एकादशी व्रत में आंवले के पेड़ की पूजा करते हैं. ऐसा क्यों होता है? भगवान विष्णु को आंवले का फल भी चढ़ाया जाता है. आंवले के पेड़ की पूजा क्यों होती है, इसका जवाब जानने से पहले यह जानना होगा कि आंवले के पेड़ की उत्पत्ति कैसे हुई?
कैसै हुई आंवले के पेड़ की उत्पत्ति?
- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा जी के आंसुओं से आंवले के पेड़ की उत्पत्ति हुई थी. इसकी कथा के अनुसार, जब धरती पर चारों ओर पानी था, तब ब्रह्मा जी को नई सृष्टि की रचना करने का विचार आया. इस पर उन्होंने भगवान विष्णु की पूजा की और उनको प्रसन्न करने के लिए तपस्या करने लगे. उनकी तपस्या से भगवान विष्णु खुश हो गए और प्रकट हुए, उनको देखकर ब्रह्मा जी बहुत खुश हुए, उनकी आंखों से खुशी के आंसू निकलने लगे. उन आंसुओं से ही आंवले के पेड़ की उत्पत्ति हुई.
- इस संसार में सबसे पहले आंवले के पेड़ की उत्पत्ति हुई थी. इसकी वजह से इसे आदि वृक्ष या आदिरोह भी कहा जाता है.
- एक अन्य मान्यता है कि आंवले के पेड़ की उत्पत्ति सागर मंथन के समय निकले हुए अमृत की बूंदों से हुआ था. मंथन के समय धरती पर जहां जहां पर अमृत की बूंदें गिरी थीं, वहां-वहां पर आंवले के पेड़ की उत्पत्ति हुई. औषधीय गुणों की वजह से इसे अमृत फल भी कहा जाता है.
आंवले के पेड़ की पूजा क्यों करते हैं?
- आमलकी एकादशी के दिन आंवले के पेड़ की उत्पत्ति हुई थी. इसमें भगवान विष्णु का वास माना जाता है. इस वजह से इस व्रत में आंवले के पेड़ की पूजा करते हैं.
- इसके अलावा जब ब्रह्मा जी के आंसुओं से आंवले के पेड़ की उत्पत्ति हुई थी तो भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी को आशीर्वाद दिया था कि आंवले का पेड़ और फल उनको प्रिय होगा. जो भी व्यक्ति आंवले के पेड़ की पूजा करेगा और उसके फल का भोग उनको लगाएगा, उसके कष्ट और पाप मिट जाएंगे.
आमलकी एकादशी व्रत से आपको क्या लाभ होंगे?
- यदि आप 27 फरवरी को आमलकी एकादशी का व्रत रखते हैं और विधि विधान से पूजा करते हैं तो आपको स्वर्ग की प्राप्ति होगी.
- आमलकी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप मिट जाते हैं और हरि कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है.
- आमलकी एकादशी का व्रत करने आपको उतना ही पुण्य प्राप्त होगा, जितना 1000 गायों को दान करने से प्राप्त होता है.
- आमलकी एकादशी पर प्रसाद और भोग में आंवले का फल का उपयोग होता है. जब आप प्रसाद स्वरूप आंवला खाते हैं तो आपकी सेहत ठीक होती है. आंवले को अमृत फल कहा जाता है क्योंकि उसमें विटामिन सी, A, B1, E, कैल्शियम और आयरन भरपूर होता है.
- आंवला खाने से आपकी त्वचा और बाल अच्छे होंगे. रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होगी. एंटीऑक्सीडेंट आपको हमेशा नौजवान बनाए रखता है.
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कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. डिजि…और पढ़ें

