आप भी सुबह भगवान की पूजा के बाद करते हैं आरती? जान लें ये बात, भूलकर भी दोपहर 12 के बाद न करें पूजा-पाठ

आप भी सुबह भगवान की पूजा के बाद करते हैं आरती? जान लें ये बात, भूलकर भी दोपहर 12 के बाद न करें पूजा-पाठ

हाइलाइट्स

घर में प्रतिदिन भगवान की पूजा-पाठ कर उनकी विधिवत आरती की जाती है. सुबह की पूजा करने के बाद भी हम घरों में आरती करते हैं.

Aarti Rules For House: सानातन धर्म में लगभग हर घर में प्रतिदिन भगवान की पूजा-पाठ कर उनकी विधिवत आरती की जाती है क्योंकि माना जाता है कि पूजा के बाद आरती करने से पूजा पूर्ण मानी जाती है, साथ ही इसका पूरा फल भी मिलता है. लेकिन क्या आपको पता है कि शास्त्रों में पूजा-पाठ व आरती से जुड़े कुछ निशेष नियम बताए गए हैं, जो हर व्यक्ति को जानना चाहिए. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

दरअसल, सुबह की पूजा करने के बाद भी हम घरों में आरती करते हैं और शाम को भी आरती का विधान है. पूजा के दौरान सभी देवी-देवताओं को बुलाकर उनका पूजन कर हम आरती करते हैं क्योंकि आरती करने से देवी-देवताओं का प्रस्थान के रूप में माना जाता है. वे हमें आशीर्वाद प्रदान कर अपने स्थान को लौट जाते हैं, इसलिए आरती का उचित रूप से होना आवश्यक है. लेकिन ज्योतिषाचार्य के मुताबिक जानते हैं कि घर में सुबह की पूजा के बाद आरती करना सही माना जाता है या नहीं, क्या हैं इसके नियम.

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सुबह की पूजा बाद आरती करें या नहीं?
शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार, आरती करने के तीन प्रमुख समय होते हैं. जिनमें प्रातःकाल, संध्याकाल और रात्रिकाल. इस तीनों समयकाल को विस्तार से जानें तो सुबह के समय मंगला आरती होती है, संध्या काल (सूर्यास्त) के समय संध्या आरती की जाती है और रात्रि काल (रात) के समय शयन आरती होती है. लेकिन ये आरतियां मंदिर में करना उचित माना जाता है. ग्रहस्थ लोगों के लिए सिर्फ संध्या आरती करना ही अच्छा माना जाता है.

सुबह के समय घर में क्यों नहीं करें आरती
शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार, सुबह की पूजा का समय सही मायनों में ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है. इसलिए अगर सुबह के समय भगवान की पूजा व आरती करनी है तो ब्रह्म मुहूर्त में करनी चाहिए. लेकिन आजकल के भागदौड़ भरे जीवन में गृहस्थ लोगों द्वारा हर नियम को फॉलो करना संभव नहीं है, इसलिए गृहस्थ्य लोग सुबह से समय अगर पूजा करते हैं तो आरती शाम के समय करें. संध्या आरती करना उचित माना जाएगा.

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दोपहर 12 बजे से पहले कर लें पूजा
बता दें कि शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि ग्रहस्थ्य जीवन में रहते हुए आप सुबह के समय की पूजा दोपहर 12 से पहले कर लें, लेकिन पूजा के बाद आरती ना करें. इससे आपकी पूजा खंडित हो जाती है क्योंकि शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त में की गई पूजा के बाद आरती ही श्रेष्ठ मानी गई है.

Tags: Astrology, Dharma Aastha, Religion

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