आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी 21 किलोमीटर की गोवर्धन परिक्रमा, जानिए धार्मिक महत्व
राष्ट्रपति मुर्मू की गोवर्धन परिक्रमा आज, जानिए धार्मिक महत्व, पूरी प्रक्रिया
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President Droupadi Murmu Govardhan Parikrama: आज 21 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की गोवर्धन परिक्रमा है. वे सबसे पहले दानघाटी मंदिर में पूजा करेंगी. इसके बाद वह 21 किलोमीटर की परिक्रमा करेंगी, जो अपने आप में ऐतिहासिक है. गोवर्धन परिक्रमा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा है और इसे करने से सुख-समृद्धि मिलती है. आइए जानते हैं गोवर्धन परिक्रमा का महत्व और पूरी प्रक्रिया.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की गोवर्धन परिक्रमा.
President Droupadi Murmu Govardhan Parikrama: आज 21 मार्च की सुबह से ही वृंदावन और गोवर्धन क्षेत्र में खास हलचल देखने को मिल रही है क्योंकि देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज गोवर्धन गिरिराज महाराज की 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा करने जा रही हैं. प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हैं. यह दौरा इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि पहली बार कोई राष्ट्रपति गोवर्धन परिक्रमा करने जा रही हैं. तय कार्यक्रम के अनुसार राष्ट्रपति का काफिला वृंदावन से गोवर्धन के लिए रवाना होगा. राष्ट्रपति दानघाटी मंदिर पहुंचकर गिरिराज जी का दुग्धाभिषेक और विधि विधान से पूजन करेंगी.
इसके बाद वह गोल्फ कार्ट के जरिए पूरी 21 किलोमीटर की परिक्रमा करेंगी. दर्शन और पूजा के बाद राष्ट्रपति पेठा हेलीपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना होंगी. पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और ट्रैफिक व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है ताकि किसी को परेशानी न हो.
वृंदावन और मथुरा में भी रहेंगे अहम कार्यक्रम
राष्ट्रपति के इस दौरे में केवल गोवर्धन परिक्रमा ही नहीं बल्कि वृंदावन और मथुरा के अन्य धार्मिक स्थलों का भी कार्यक्रम शामिल है. वह प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में दर्शन करेंगी, जहां मंदिर प्रशासन द्वारा उनका स्वागत किया जाएगा. इसके अलावा श्री कृष्ण जन्मभूमि जाने की संभावना भी जताई जा रही है. उनके दौरे को देखते हुए पूरे इलाके को नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है और सुरक्षा के लिहाज से विशेष इंतजाम किए गए हैं.
गोवर्धन परिक्रमा का धार्मिक महत्व क्या है?
गोवर्धन परिक्रमा हिंदू धर्म की सबसे पवित्र परंपराओं में से एक मानी जाती है और इसका सीधा संबंध भगवान श्री कृष्ण से जुड़ा है. मान्यता के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र देव के प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाया था. तभी से गोवर्धन पर्वत को भगवान का स्वरूप माना जाता है और उसकी परिक्रमा करने की परंपरा शुरू हुई. भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई यह परिक्रमा जीवन के दुख दूर करती है, मनोकामनाएं पूरी करती है और सुख समृद्धि लेकर आती है. इसलिए हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आकर परिक्रमा करते हैं.
गोवर्धन परिक्रमा कैसे की जाती है?
गोवर्धन परिक्रमा करीब 21 किलोमीटर लंबी होती है और इसकी शुरुआत आमतौर पर दानघाटी मंदिर से होती है. श्रद्धालु नंगे पैर इस परिक्रमा को पूरा करते हैं और रास्ते में राधा कुंड, श्याम कुंड, मानसी गंगा और कुसुम सरोवर जैसे पवित्र स्थानों पर रुककर पूजा अर्चना करते हैं. कई लोग यह परिक्रमा एक ही दिन में पूरी कर लेते हैं जबकि कुछ लोग इसे धीरे-धीरे करते हैं. कुछ भक्त दंडवत परिक्रमा भी करते हैं जो अधिक कठिन मानी जाती है. पूरे रास्ते में भक्ति गीत और जयकारों का माहौल बना रहता है जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो जाता है.
परिक्रमा से जुड़ी मान्यताएं और सावधानियां
मान्यता है कि श्रद्धा और नियम के साथ की गई परिक्रमा जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है. परिक्रमा करते समय साफ सुथरे कपड़े पहनना, संयम रखना और आसपास की स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी होता है. भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के खास इंतजाम किए जाते हैं ताकि सभी श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से परिक्रमा कर सकें. आज राष्ट्रपति के दौरे के कारण सुरक्षा और भी ज्यादा सख्त रखी गई है.
राष्ट्रपति की परिक्रमा का क्या संदेश है
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह कदम देश के लिए एक मजबूत संदेश लेकर आता है कि आधुनिक समय में भी हमारी आस्था और परंपराएं उतनी ही महत्वपूर्ण हैं. देश के सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति जब इस तरह की धार्मिक परंपरा से जुड़ता है तो यह पूरे देश के लिए प्रेरणा बनता है. इससे भारत की सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूती मिलती है और लोगों में अपने धर्म और परंपराओं के प्रति जुड़ाव बढ़ता है.
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मीडिया इंडस्ट्री में 8+ साल का अनुभव, ABP, NDTV, दैनिक जागरण और इंडिया न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़कर काम किया। लाइफस्टाइल, धर्म और संस्कृति की कहानियों को रोचक अंदाज़ में प्रस्तुत करने का खास हुनर।…और पढ़ें


