आज रंगभरी एकादशी पर शिवजी की इस शुभ मुहूर्त पर करें पूजा, जानें महत्व, पारण का समय
रंगभरी एकादशी से शुरू हो जाता है होली पर्व का जश्न
रंगभरी एकादशी 27 फरवरी को इस साल मनाया जा रहा है. इस शुभ मौके पर लोग पूजा-पाठ करते हैं. उपवास रखकर भोलेनाथ, माता पार्वती की आराधना करते हैं. शिवनगरी काशी के साथ ही देश के कई हिस्सों में रंगभरी एकादशी के दिन से रंगों के पर्व होली का जश्न शुरू हो जाता है. धार्मिक मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के दिन विवाह के बाद भगवान शिव पहली बार माता पार्वती के साथ काशी आए थे. माता पार्वती का गौना इसी दिन हुआ था.
कब तक रहेगी एकादशी तिथि?
दृक पंचांग के अनुसार, 27 फरवरी को एकादशी तिथि रात 10 बजकर 32 मिनट तक रहेगी. इसके बाद द्वादशी शुरू होगी. नक्षत्र की बात करें तो आर्द्रा नक्षत्र सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. उसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र शुरू हो जाएगा. योग आयुष्मान शाम 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगा. करण वणिज सुबह 11 बजकर 31 मिनट तक और उसके बाद विष्टि करण रहेगा.
बन रहे हैं दो शुभ योग
इस दिन कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जिनमें सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 10: 48 मिनट से अगले दिन 27 फरवरी की सुबह 6 बजकर 47 मिनट तक, रवि योग सुबह 6:48 मिनट से 10: 48 मिनट तक रहेगा. शुक्रवार को सूर्योदय 6:48 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6:20 मिनट पर होगा.
रंगभरी एकादशी शुभ मुहूर्त
रंगभरी एकादशी के शुभ मुहूर्त की बात करें तो, दिन में 12:16 मिनट से लेकर 1:2 मिनट तक पूजा के लिए शुभ मुहूर्त रहेगा. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजतक 17 मिनट से लेकर 6 बजकर 5 मिनट तक रहेगा. आप शुभ मुहूर्त के दौरान पूजा कर लें, इससे शुभ होगा. रंगभरी या आमलकी एकादशी का पारण 28 फरवरी को सुबह के समय लगभग 6 बजकर 47 मिनट से लेकर 9 बजकर 6 मिनट के बीच में कर सकते हैं.
रंगभरी एकादशी का महत्व क्या है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रंगभरी एकादशी पर शिव भगवान की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है. इच्छाओं की पूर्ति होती है. इसी दिन आमलकी एकादशी का व्रत रखने वालों को मोक्ष और स्वर्ग की प्राप्ति होती है. इस व्रत में आंवले का भी विशेष महत्व होता है. आज के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करके विष्णु जी को आंवले का भोग जरूर लगाना चाहिए.
रंगभरी एकादशी पूजा विधि
सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें और नए या साफ वस्त्र धारण करें. लोटे में जल, बेलपत्र, चंदन, अबीर-गुलाल लें. शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं. जल अर्पित करें. बेलपत्र चढ़ाएं. अबीर-गुलाल चढ़ाएं और मन में शिव जी से हाथ जोड़कर प्रार्थना करें. अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए आशीर्वाद मांगे.
आज के दिन आप आंवले के पेड़ की भी पूजा अवश्य करें. स्नान करने के बाद आंवले के वृक्ष के पास जाकर जल, फूल, धूप, दीप आदि चढ़ाएं-जलाएं. वृक्ष की नौ या सताइस बार परिक्रमा करके सुख-समृद्धि, सौभाग्य, सेहत की कामना करें. आप अपने घर के आंगन, बगिया में आंवले का पौधा भी लगा सकते हैं. ऐसा करना बेहद शुभ माना गया है.


