अपने परमप्रिय भक्त हनुमान से कैसे हुई थी प्रभु श्रीराम की पहली मुलाकात, जानें इस भावनात्मक पल की पूरी कथा

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Ram Hanuman Ki Pehli Mulakat: भगवान राम और हनुमान जी की मुलाक़ात जीवन का एक निर्णायक क्षण था. इसने न केवल उनकी भक्ति की नींव रखी, बल्कि रामायण की कथा को भी एक नई दिशा दी. हनुमान जी की निष्ठा, भक्ति और सेवा भाव न…और पढ़ें

रामायण कथा

हाइलाइट्स

  • हनुमान और राम की पहली मुलाकात ऋष्यमूक पर्वत पर हुई।
  • हनुमान जी ने राम को ब्राह्मण वेश में मिलकर परिचय पूछा।
  • राम की करुणा और सत्यता ने हनुमान को भावविभोर किया।

Ram Hanuman Pehli Mulakat: रामायण में वर्णित भगवान राम और हनुमान जी की पहली मुलाकात एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण और भावुक प्रसंग है. यह घटना ऋष्यमूक पर्वत के पास घटित हुई जहां सुग्रीव अपने भाई बाली के डर से शरण लिए हुए थे. जब भगवान राम और लक्ष्मण सीता की खोज में वन-वन भटक रहे थे, तब वे ऋष्यमूक पर्वत पहुंचे. सुग्रीव ने उन्हें दूर से देखा और आशंका हुई कि कहीं ये बाली द्वारा भेजे गए गुप्तचर तो नहीं हैं. अपनी शंका का निवारण करने के लिए उन्होंने अपने सबसे विश्वासपात्र सेवक हनुमान जी को भेजा ताकि वे इन दोनों राजकुमारों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें.

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ब्राह्मण का वेश किया धारण
हनुमान जी एक ब्राह्मण का वेश धारण करके राम और लक्ष्मण के पास गए. उन्होंने अत्यंत विनम्रता से उनसे उनके परिचय और वन में आने का कारण पूछा. भगवान राम ने भी सहजता से अपना परिचय दिया और सीता हरण की पूरी कथा सुनाई. राम की वाणी में करुणा और सत्यता थी जिसने हनुमान जी के हृदय को छू लिया.

भावविभोर हुए हनुमान
राम की बातें सुनकर हनुमान जी भावविभोर हो गए. उन्हें तुरंत ज्ञात हो गया कि ये कोई साधारण मनुष्य नहीं बल्कि स्वयं भगवान विष्णु के अवतार हैं. हनुमान जी का हृदय भक्ति से भर गया और वे भगवान राम के चरणों में गिर पड़े. यह एक अद्भुत मिलन था, भक्त और भगवान का मिलन.

इस पहली मुलाकात में ही हनुमान जी ने भगवान राम के प्रति अपनी अनन्य भक्ति और सेवा का भाव प्रकट कर दिया था. राम ने भी हनुमान जी को उठाकर अपने गले से लगाया और उन्हें अपना परम प्रिय भक्त घोषित किया.

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इसके बाद हनुमान जी ने राम और लक्ष्मण को अपने कंधे पर बैठाया और सुग्रीव के पास ले गए. वहां राम और सुग्रीव के बीच मित्रता की संधि हुई. सुग्रीव ने सीता की खोज में वानरों की सहायता करने का वचन दिया और भगवान राम ने बाली का वध करके सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाने का आश्वासन दिया.

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अपने परमप्रिय भक्त हनुमान से कैसे हुई थी प्रभु श्रीराम की पहली मुलाकात

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