अधिकमास में श्राद्ध की अमावस्या कब?जानें तारीख, मुहूर्त, पितरों की मुक्ति का सबसे बड़ा दिन
अधिकमास में श्राद्ध की अमावस्या कब?जानें तारीख,मुहूर्त,पितरों की मुक्ति का दिन
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Adhik Maas Shradh Amavasya 2026 Date: अधिकमास में श्राद्ध की अमावस्या पितरों की मुक्ति का सबसे बड़ा दिन है. यह मौका हर 3 साल में एक बार मिलता है. इस दिन तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि करने से पितर प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं. इस साल अधिकमास में श्राद्ध की अमावस्या और अधिकमास अमावस्या दोनों अलग-अलग दिन हैं.
अधिकमास में श्राद्ध की अमावस्या कब है? जानें तारीख और मुहूर्त. (Photo: AI)
Adhik Maas Shradh Amavasya 2026 Date: अधिकमास में श्राद्ध की अमावस्या अधिकमास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को होता है. लेकिन इस बार तिथि के समय के कारण अधिकमास की अमावस्या और अधिकमास में श्राद्ध की अमावस्या अलग-अलग दिन हैं. अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, जिसके प्रतिनिधि देव भगवान विष्णु हैं. यह मास हर 3 साल में एक बार आता है, जिसकी वजह से अधिकमास की अमावस्या भी 3 साल में एक बार पड़ती है. यह पितरों की मुक्ति के श्रेष्ठ दिनों में से एक है. इस दिन पूजा, पाठ, तर्पण, श्राद्ध करने से और हरि कृपा से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है.
अधिकमास अमावस्या 2026 तिथि मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, 14 जून को दोपहर 12:19 बजे से अधिकमास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि शुरू हो रही है. इस तिथि का समापन 15 जून को सुबह 08:23 बजे होगा. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर अधिकमास की अमावस्या 15 जून को है. लेकिन उस दिन पितरों का श्राद्ध नहीं हो सकेगा.
अधिकमास में श्राद्ध की अमावस्या की तारीख
दरअसल पितरों का श्राद्ध कर्म दिन में 11 या 11:30 बजे के बाद से करते हैं. 15 जून को अमावस्या तिथि सुबह में ही खत्म हो जा रही है. दोपहर से शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ हो जा रहा है. 14 जून को अमावस्या तिथि दोपहर में प्रारंभ हो रही है, ऐसे में अधिकमास में श्राद्ध की अमावस्या 14 जून को है. उस दिन ही पितरों का श्राद्ध कर्म कर सकते हैं.
अधिकमास श्राद्ध अमावस्या 2026 मुहूर्त
जो लोग अधिकमास में श्राद्ध की अमावस्या पर अपने पितरों का श्राद्ध, पिंडदान, ब्राह्मण भोज, पंचबलि कर्म आदि करना चाहते हैं, वे लोग दोपहर 12:19 बजे से कर सकते हैं, उस समय से अमावस्या तिथि लग जाएगी. श्राद्ध का काम आपको दोपहर 02:30 बजे तक संपन्न कर लेना चाहिए.
पितरों को कैसे दें तर्पण?
इस दिन आप स्नान के बाद अमावस्या तिथि में अपने पितरों के लिए तर्पण दे सकते हैं. हाथ में जल और काला तिल लेकर कुशा की मदद से तर्पण देते हैं. कुशा की मदद से तर्पण न देने से वह जल पितरों को प्राप्त नहीं होता है. शास्त्रों के अनुसार उस जल को प्रेत या अन्य अतृप्त आत्माएं ग्रहण कर लेती हैं.
श्राद्ध अमावस्या का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन पितर पितृ लोक से धरती पर आते हैं. वे अपनी संतान से यह उम्मीद करते हैं कि वे तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि से उनको तृप्त करें. जब वे तृप्त होते हैं तो अपनी संतान को उन्नति का आशीर्वाद देते हैं. जो लोग अमावस्या पर अपने पितरों को तृप्त नहीं करते हैं, उनको पितर श्राप देते हैं, इससे पितृ दोष लगता है.
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कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. धर्म में पचांग, पुराणों और शास्त्रों के आधार पर व्…और पढ़ें


