मां कामाख्या ने अपने प्रिय पुजारी को क्यों बना दिया पत्थर? पढ़ें केंद्रकलाई की रहस्यमयी कहानी

मां कामाख्या ने अपने प्रिय पुजारी को क्यों बना दिया पत्थर? पढ़ें केंद्रकलाई की रहस्यमयी कहानी

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Kendrakalai Priest Story: मां कामाख्या मंदिर की रहस्यमयी कथा जिसमें भक्त पुजारी केंद्रकलाई और राजा नर नारायण की कहानी छिपे हुए नियमों, आस्था और मां के श्राप को उजागर करती है. यह घटना आज भी भक्तों को प्रेरित करत…और पढ़ें

केंद्रकलाई पुजारी की कहानी

हाइलाइट्स

  • मां कामाख्या ने अपने प्रिय पुजारी को पत्थर बना दिया.
  • राजा नर नारायण ने मां कामाख्या का नृत्य देखने की कोशिश की.
  • मां कामाख्या मंदिर में कोच वंश के लोग प्रवेश नहीं करते.
Kendrakalai Priest Story: मां कामाख्या मंदिर की गिनती भारत के सबसे प्राचीन और शक्तिशाली मंदिरों में होती है. यह मंदिर असम के गुवाहाटी में स्थित है और यहां देवी शक्ति के तंत्र स्वरूप की पूजा होती है. माना जाता है कि यहां देवी मां सीधे अपने भक्तों को आशीर्वाद देने आती हैं. इस मंदिर से जुड़ी कई रहस्यमयी कहानियां प्रचलित हैं जिनमें से एक सबसे अनोखी कहानी है मां कामाख्या और उनके भक्त पुजारी केंद्रकलाई की. कहा जाता है कि मां कामाख्या ने खुद अपने प्रिय पुजारी को मार डाला था. आखिर क्यों मां को ऐसा करना पड़ा? इस घटना के पीछे की कहानी जानकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे. आइए जानते हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से यह पूरी घटना विस्तार से.

मां कामाख्या मंदिर का इतिहास
करीब 600 साल पहले की बात है जब मां कामाख्या मंदिर के गर्भगृह में पूजा करने का जिम्मा केंद्रकलाई नाम के पुजारी के पास था. वह मां के सच्चे भक्त थे और हर शाम गर्भगृह का दरवाजा बंद करके आंखें मूंदकर मां की आरती करते थे. कहा जाता है कि इसी समय मां कामाख्या वहां स्वयं प्रकट होकर नृत्य करती थीं. केंद्रकलाई ने कभी अपनी आंखें नहीं खोलीं, लेकिन मां के पायल की मधुर आवाज सुनते रहते थे.

मां का श्राप और राजा की सजा
जैसे ही राजा की नजर मां पर पड़ी, उनकी आंखों की रोशनी चली गई. मां कामाख्या को सब समझ में आ गया कि उनका नृत्य किसी ने देख लिया है. वह बहुत क्रोधित हो गईं और उन्होंने तुरंत श्राप दिया कि अब से अगर कोच वंश का कोई भी व्यक्ति मंदिर में प्रवेश करेगा, तो या तो वह अंधा हो जाएगा या उसकी मृत्यु हो जाएगी. आज भी कोच वंश से जुड़े लोग मां कामाख्या मंदिर में प्रवेश नहीं करते.

केंद्रकलाई का अंत
राजा की इस हरकत से मां कामाख्या बेहद दुखी और क्रोधित थीं. उन्हें यह भी महसूस हुआ कि केंद्रकलाई ने राजा को रोकने में कमजोरी दिखाई. मां ने अपने प्रिय पुजारी को पत्थर का बना दिया. कहा जाता है कि आज भी गर्भगृह के पास केंद्रकलाई का पत्थर का रूप मौजूद है. यह घटना भक्तों को यह संदेश देती है कि मां के नियमों का पालन करना कितना जरूरी है.

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मां कामाख्या ने अपने प्रिय पुजारी को क्यों बना दिया पत्थर?

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