भारत का अनोखा मंदिर जहां दरवाजे से नहीं होते दर्शन, प्रसाद देने का भी है यहां अलग तरीका, जानें कैसी है ये परंपरा
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Krishna Temple Udupi: कर्नाटक के उडुपी में स्थित श्री कृष्ण मंदिर भक्तों की आस्था और चमत्कारों का प्रतीक है. इस मंदिर की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां भगवान श्री कृष्ण के दर्शन एक छोटी खिड़की से किए जाते हैं, जि…और पढ़ें
कर्नाटक के उडुपी में स्थित श्री कृष्ण मंदिर
हाइलाइट्स
- उडुपी कृष्ण मंदिर में खिड़की से होते हैं भगवान के दर्शन.
- मंदिर में फर्श पर परोसा जाता है प्रसाद.
- मंदिर सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है.
Udupi Krishna Temple: उडुपी को ‘दक्षिण भारत का मथुरा’ कहा जाता है, क्योंकि यह भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए एक पवित्र स्थान है. उडुपी का कृष्ण मंदिर कृष्ण भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है. हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां भगवान कृष्ण के दर्शन और पूजा करने आते हैं. इस मंदिर में भगवान कृष्ण की सबसे सुंदर मूर्ति मानी जाती है, जिसमें वे अपने बचपन के स्वरूप बालकृष्ण के रूप में विराजमान हैं.
इस मंदिर में कोई भी सीधे मूर्ति के दर्शन नहीं कर सकता. भगवान कृष्ण के दर्शन यहां आपको 9 छिद्रों वाली एक छोटी खिड़की से होते हैं. यह मंदिर अपने आप में बहुत ही अनोखा और रोचक है.
मान्यता है कि भगवान ने अपने एक भक्त की भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं यह खिड़की बनवाई थी ताकि हर कोई उनके दर्शन कर सके. यह मंदिर 13वीं शताब्दी में श्री माधवाचार्य द्वारा स्थापित किया गया था और तब से यह दक्षिण भारत के सबसे प्रसिद्ध और पवित्र मंदिरों में से एक माना जाता है.
घंटों इंतजार करना पड़ता है इंतजार
जन्माष्टमी के अवसर पर इस मंदिर की भव्य सजावट देखने लायक होती है. मंदिर को फूलों, दीपों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है, और भक्तों को भगवान की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है.
एक अन्य मान्यता
मंदिर से जुड़ी एक और प्रसिद्ध मान्यता है कि एक बार श्री माधवाचार्य ने समुद्र में तूफान में फंसे एक जहाज को अपनी दिव्य शक्तियों से बचाया था. जब जहाज किनारे आया तो उसमें श्री कृष्ण की एक मूर्ति मिली, जो समुद्र की मिट्टी से ढकी हुई थी. माधवाचार्य ने उस मूर्ति को उडुपी लाकर इस मंदिर में स्थापित किया, जिसे आज भी भक्त श्रद्धा से पूजते हैं.
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फर्श पर परोसा जाता है प्रसाद
इस मंदिर में श्रद्धालुओं को मंदिर के फर्श पर प्रसाद परोसा जाता है. मान्यता है कि श्रद्धालु खुद फर्श पर प्रसाद परोसने की मांग करते हैं. इसके पीछे वजह है उनकी मनोकामना का पूरा होना. दरअसल, जिन भक्तों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है, वे मंदिर के फर्श पर प्रसाद खाते हैं. इस प्रसाद को प्रसादम या नौवैद्यम कहा जाता है.


