नहीं जा पा रहे हैं कैंची धाम? घर बैठे नीम करौली बाबा के पास लगाएं अर्जी, हर मनोकामना होगी पूरी!
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Kaichi Dham: नीम करोली बाबा जिन्हें महाराज जी के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रसिद्ध भारतीय संत हैं जिनके भक्त मानते हैं कि वे भगवान हनुमान जी के अवतार थे. नीम करोली बाबा के आश्रम कैंची धाम में बड़ी संख्या में …और पढ़ें
नीम करोली बाबा
हाइलाइट्स
- नीम करोली बाबा के पास घर बैठे अर्जी लगाएं.
- सच्ची श्रद्धा से प्रार्थना करें, मनोकामना पूर्ण होगी.
- नीम करोली बाबा को भगवान हनुमान का अवतार माना जाता है.
Neem Karoli Baba ke pass Arji Kaise Lagaye: अगर आप किसी कारणवश कैंची धाम नहीं जा पा रहे हैं या महाराज जी के दर्शन नहीं कर पा रहे हैं, तो चिंता की कोई बात नहीं है. आज हम आपको कुछ ऐसा उपाय बताने जा रहे हैं, जिससे आप घर बैठे अपनी बात महाराज जी तक पहुंचा सकते हैं और अपनी अर्जी लगा सकते हैं. इससे आपको घर बैठे उनका आर्शीवाद प्राप्त होगा. मान्यता है कि महाराज जी का आशीर्वाद पाने के लिए सबसे जरूरी है सच्ची श्रद्धा और भक्ति.
ऐसे लगाएं अर्जी
अगर आपके मन में कोई परेशानी है, कोई इच्छा है, तो बस अपने घर में रखी महाराज जी की फोटो या मूर्ति के सामने बैठकर दिल से प्रार्थना करें. जैसे हम अपने माता-पिता से दिल की बात करते हैं, वैसे ही पूरी श्रद्धा और भाव से महाराज जी से बात करें. आपको किसी विशेष उपाय या विधि की जरूरत नहीं है. बस सच्चे मन से महाराज जी का ध्यान करें और अपनी बात कह दें. बाकी सब कुछ महाराज जी के ऊपर छोड़ दें. मान्यता है कि जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा से नीम करौली बाबा के दरबार में अर्जी लगता है उसकी मनोकामना पूर्ण होती हैं.
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महाराज जी कहते हैं, “चिंता मत कर”. इसका मतलब है कि जब आपने अपनी समस्या महाराज जी के चरणों में समर्पित कर दी, तो अब चिंता करने की जरूरत नहीं है.
नीम करोली बाबा कौन थे?
नीम करोली बाबा, भगवान हनुमान जी के भक्त थे. उनके भक्त उन्हें “महाराज जी” के नाम से पुकारते थे. उनका असली नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में हुआ था.
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नीम करोली बाबा को यह नाम कैसे मिला?
1958 में, नीम करोली बाबा, जिन्हें पहले बाबा लक्ष्मण दास के नाम से जाना जाता था, बिना टिकट ट्रेन में चढ़ गए. जब उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के नीम करोली गांव में उन्हें ट्रेन से उतारा गया, तो ट्रेन का इंजन चालू ही नहीं हुआ. कई प्रयासों के बाद भी ट्रेन नहीं चली, तो किसी ने सुझाव दिया कि बाबा को वापस ट्रेन में बैठाया जाए.
बाबा ने ट्रेन में बैठने से पहले दो शर्तें रखीं कि गांव के लोगों की सुविधा के लिए नीम करोली गांव में एक रेलवे स्टेशन बनाया जाए. रेलवे कर्मचारी साधुओं के साथ अच्छा व्यवहार करें. जब अधिकारियों ने उनकी शर्तें मान लीं, तो बाबा ने मुस्कुराते हुए कहा, “भला, मेरे बैठने से ट्रेन को क्या फर्क पड़ता है?” जैसे ही बाबा ने ट्रेन में कदम रखा, इंजन तुरंत चालू हो गया. बाद में रेलवे स्टेशन भी बन गया. तभी से, गांव वालों ने प्रेम और सम्मान में उन्हें ‘नीम करोली बाबा’ कहना शुरू कर दिया.
March 15, 2025, 13:45 IST
नहीं जा पा रहे हैं कैंची धाम? घर बैठे नीम करौली बाबा के पास लगाएं अर्जी


